अघोरेभ्योथघोरेभ्

मुक्त होने की नहीं कुछ कामना है|जगत का कल्याण मेरी साधना है|| मृत्यु का मुझको नहीं लवमात्र भय है|मैं अभय हूँ,रूद्र हूँ,मेरी विजय है||

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viplavimayank


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बुलाते हैं….चले आओ..जहाँ हो

Posted On: 22 Jan, 2013  
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इस लाम में क्या रक्खा है?

Posted On: 16 Sep, 2012  
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आधी तीतर और बटेर सी

Posted On: 14 Sep, 2012  
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प्रेम दिवस

Posted On: 16 Feb, 2012  
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हर देखे हगि देत हैं

Posted On: 1 Feb, 2012  
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जो घर फूंके आपनो आवे म्हारे साथ

Posted On: 26 Jan, 2012  
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यह राष्ट्र मेरी आत्मा है

Posted On: 24 Jan, 2012  
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मैं इसे गणतंत्र कैसे मान लूँ?

Posted On: 22 Jan, 2012  
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Hello world!

Posted On: 21 Jan, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: nishamittal nishamittal

प्रिय राजीव भाई, मैंने यह कब कहा की वंशवाद प्रत्येक दल की समस्या नहीं है...मैंने तो बस इतना कहना चाहा है की जिनती भी राजनैतिक गंदगी है..सबकी सर्जनहार कांग्रेस है|सभी दलों को फूट डालों और राज करो की रणनीति तो इसी ने सिखाई है ना|यह तो स्पष्ट ही है की दूसरी समस्या वोट बैंक की राजनीती से जुडी हुई है किन्तु इसके साथ यह भी स्पष्ट है की प्रथम आम चुनाव से लगायत अब तक मुस्लिम वोट बैंक हमेशा फतवों से ही प्रभावित होता रहा है और थोक के भाव होता रहा है|इसने कभी भी विकास के नाम पर वोट नहीं दिया|नेहरु के नेतृत्व में तत्कालीन कांग्रेस भी इस तथ्य से अनभिग्य नहीं थी|कांग्रेस ने मुसलमानों का तुष्टिकरण किया ही इसी खातिर की उनका भय दिखा कर हिन्दुओं के मतों को जातिवादी आधार पर और हिन्दुओं का भय दिखा कर मुस्लिम मतों को अपने खेमे में लाया जा सके|प्रतिक्रया का आभार|वन्दे मातरम||

के द्वारा: viplavimayank viplavimayank

प्रिय वासुदेव भाई, सादर वन्दे मातरम्| किसी शायर ने कहा है वतन को काम था तो लहू हमने दिया था,बहार आई है तो कहते है तेरा काम नहीं|आज जब समग्र राष्ट्र गणतंत्र दिवस मना रहा है मुझे अकस्मात वह बात याद आ जाती है जब राजीव गाँधी ने इसे स्वतंत्रता दिवस कह कर संबोधित किया था|यथा राजा तथा प्रजा मुझे पूरा विश्वास है की यदि सामान्य देहाती से यह पूछ जाय की गणतंत्र की औपचारिकता क्या है तो अधिकांस अनभिग्य होंगे|जन गन मन से लाखो गुना अच्छा सब सुख चैनकी बरखा बरसे अर्थात आजाद हिंद फ़ौज का गणगीत था किन्तु अंधे लोगों को यह कहाँ दिखाई देता है?आज हम बस कहने को परवश नहीं है मुझे तो हर जगह परवशता ही दिखाई देती है|आपकी प्रतिक्रिया को सादर नमन|जय भारत, जय भारती||

के द्वारा: viplavimayank viplavimayank




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